सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर माह में दिए समाज की दशा और दिशा बदलने वाले 8 बड़े फैसले 1. समलैंगिकता : सर्वोच्च न्यायालय ने 6 सितंबर के अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में धारा 377 को रद्द करते हुए कहा कि समलैंगिकता अपराध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को अतार्किक और मनमानी बताते हुए कहा कि LGBT समुदाय को भी समान अधिकार हैं। अंतरंगता और निजता किसी की व्यक्तिगत पसंद है। इसमें राज्य को दखल नहीं देना चाहिए। किसी भी तरह का भेदभाव मौलिक अधिकारों का हनन है। धारा 377 संविधान के समानता के अधिकार आर्टिकल 14 का हनन करती है। 2. राजनीति में अपराधीकरण : 25 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव लड़ने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार अपना आपराधिक रिकॉर्ड निर्वाचन आयोग के समक्ष घोषित करे। साथ ही उसने सभी राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने उम्मीदवारों के संबंध में सभी सूचनाएं अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि नागरिकों को अपने उम्मीदवारों का रिकॉर्ड जानने का अधिकार है। पीठ ने विधायिका को निर्दे...
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